अधिक नुकसान के कारण :- भूकंप से होने वाले नुकसान के कई कारण हैं। घरों की खराब बनावट खराब संरचना भूमि का प्रकार, जनसंख्या आदि। भारत को भूकंप क्षेत्र के आधार पर चार हिस्सो जोन-2, जोन-3, जोन-4 जोन-5 में बांटा गया है। जोन-2 सबसे कम खतरे वाला जोन-5 सर्वाधिक खतरनाक है।
भूकंप संबंधी शब्दावली
आफ्टरशॉक (बाद के झटके) :- सामान्य या कम तीव्रता का एक भूकंप जो मुख्य भूकंप के बाद ही अर्थक्वेक (भूकंप ) पृथ्वी की पपड़ी के एक हिस्से का अचानक फिसलना या खिसकना, जिसके साथ व बाद में कंपन की एक श्रृंखला हो।
इपिसेंटर (उपरोकेन्द्र) पृथ्यों की सतह पर उस 2- दोष बिंदु के सीधे ऊपर यह जगह जहाँ भूकंप के लिए टूटना शुरू हुआ। एक बार दोष का फिसलना आरंभ हो जाए, उसके बाद वह भूकंप के दौरान दोष के साथ फैलता है और रोकने से पहले सैकड़ों मील तक विस्तारित हो सकता है।
फाल्ट दोष :- वह फ्रैक्चर जिसके दोनों और एक भूकंप के दौरान विस्थापन हुआ है। एक गंभीर भूकंप में फिसलने की सीमा एक इंच से लेकर 10 गज से अधिक हो सकती है।
मैग्नीट्यूड (तीव्रता ) :- एक भूकंप के दौरान उत्सर्जित ऊर्जा को मात्रा, जिसको गणना भूकंपीय तरंगों के आयाम से की जाती है। रियेक्टर स्केल पर 7.0 की तीव्रता एक अत्यंत तीव्र भूकंप को इंगित करती है। इस पैमाने पर प्रत्येक पूर्ण संख्या उससे पिछली पूर्ण संख्या द्वारा दर्शायी गई
उत्सर्जित ऊर्जा में लगभग 30 गुणा वृद्धि का प्रतिनिधित्व करती है।
सीस्मिक वेव्स (भूकंपीय तरंगें कंपन जो भुकंपीय दोष से बाहर की ओर कई मील प्रति सेकंड की गति से चलते हैं। हालांकि एक संरचना के सीधे नीचे के दोष का खिसकना काफी नुकसान कर सकता है, भूकंपीय तरंगों के कंपन भूकंप के दौरान अधिकांश विनाश करते हैं।
भूकंप तीव्रता का मापन : इसके लिए रियेक्टर स्केल पैमाने का इस्तेमाल किया जाता है। इसे रियेक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिवेक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। रिपेक्टर स्केल पैमाने को सन् 1935 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था। प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुना बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है यह प्रति स्कल 32 गुणा बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रियेक्टर स्केल पर भूकंप की भयानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 रियेक्टर पैमाने पर जाया भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न करता है।
रियेक्टर स्केल पर भूकंप
रियेक्टर स्केल पर 2.0 तीव्रता के कम से कम आठ हजार झटके रोज आते हैं। ये इंसान को महसूस नहीं होते।
★ 2.0 से 2.9 तीव्रता के लगभग एक हजार झटके रोजाना दर्ज किए जाते है, से भी महसूस नहीं होते हैं। > रियेक्टर स्केल पर 3.0 से 3.9 तीव्रता के झटके साल में लगभग 41 हजार बार दर्ज किए जाते हैं, जो अक्सर महसूस नहीं होते, लेकिन कभी-कभार नुकसान कर देते हैं।
> 4.0 से 4.9 की तीव्रता वाले भूकंप साल में लगभग 6200 बार दर्ज होते हैं, इसको भरथराहट महसूस होती है। कई बार नुकसान भी हो जाता है।
5.0 से 5.9 तक का भूकंप एक छोटे क्षेत्र में स्थित कमजोर मकानों को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाता है। ये साल में लगभग 800 बार महसूस होते हैं।
60 से 69 तक की तीव्रता वाला भूकंप साल में लगभग 120 बार दर्ज किया जाता है और यह 160 किलोमीटर तक के दायरे में घातक साबित होता है। 7.0 से 79 तक की तीव्रता का भूकंप एक बड़े क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है और एक साल में लगभग 18 बार दर्ज किया जाता है। अभी नेपाल में यही आया था।
रिवेक्टर स्केल पर 8.0 से 8.9 तीव्रता वाला भूकंपीय झटका सैकड़ों किलोमीटर के क्षेत्र में भीषण तबाही मचा सकता है। यह साल में एकाध बार महसूस होता है।
9.0 से लेकर 9.9 तक के पैमाने का भूकंप हजारों किलोमीटर के क्षेत्र में तबाही मचा सकता है; जो 20 साल में लगभग एक बार आता है। दूसरी ओर 10.0 से या इससे अधिक का भूकंप आज तक महसूस नहीं किया गया।



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